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Showing posts with the label कवि: नकुल कुमार 08083686563

भईया........

इधर आप दिल जलाते हो, और उधर भाभी की रोटियां जल जाती है।। इधर आप दिल लगाते हो , और उधर भाभी का दिल टूट जाता है।। वह सज-धजकर आपका इंतजार करती है, और एक आप हो, जो उन्हें बेकरार किए रहते हो. दिन रात मेहनत करके, जो खुद को मालामाल करते हो. एक बार भी भाभी का, क्यों नहीं ख्याल करते हो.                                                         दरवाजे के आड़ से,.                     निहारती है आपको, सिसकते हुए,दौड़कर बिछावन पर गिरती है. तकिए को पकड़ कर, संभालती हैं खुद को.         उनके होठों की लाली में भी, मूक इंतजार रहता है. उनका मन और यौवन, इस कदर बेकरार रहता है .                         अब बस भी करो भैया, घर समय पर आओ ना .   बेकरार भाभी पर, प्यार खूब बरसाओ ना.   क्योंकि अब दरवाजे पर भाभी, बेलन लेकर किसी ...

भाभी का तात्क्षणिक प्यार..... नकुल कुमार

इधर आप दिल जलाते हो, और उधर भाभी की रोटियां जल जाती है।। इधर आप दिल लगाते हो , और उधर भाभी का दिल टूट जाता है।।.                                           वह सज-धजकर आपका इंतजार करती है,.                                 और एक आप हो,.                                                                     जो उन्हें बेकरार किए रहते हो.                                                     दिन रात मेहनत करके,                                 ...

करोड़पति सुशील कुमार

न भारी लगते हो, न अनाड़ी लगते हो, न मोतिहारी के व्यापारी लगते हो।। यत्न करते रहना करोड़पति बाबू, आप मुलाजिम कहीं के सरकारी लगते हो।।

नकुल कुमार के अधूरे प्रेम की अधूरी कहानी भाग-03

कक्षाएं बदल गई, वक्त बदल गया। सभी बदल गए, तुम कब बदलोगें....? वक्त को टालें बगैर, कभी तुम भी बदल जाओ।। तुम्हे जो अच्छा लगता हैं ,  वह हमें भी पसंद हो ये कोई जरुरी नहीं। इंसान बनकर, इंसान बन जाएं हमसब ये जरूरी है। कितना अच्छा लगता था,जब तुम देखा करते थे।                           बड़ी बड़ी आंखों से जैसे मुझे ही निहारा करते थे ।। चश्मा उठाकर भी देखा करते थे,और जब मैं देखता तो चश्मा निकालकर साफ करने लगते थे।  कितना सुहावना दिन था,कितना मनभावन दृश्य था । तुम भी देखा करते थे,हम भी देखा करते थे।।  कागज के पन्ने पर जो मोहब्बत की लकीर तुमने खींची थी,हमारे लिए तो लक्ष्मण रेखा से कम न थी । एक तरफ तुम नजर मिलाया करते थे, दूसरी तरफ अपनों का डर दिखाया करते थे। मिस कॉल मारा करते थे और फोन नहीं उठाया करते थे कितना मनोरम दृश्य था और कितना मनभावन दिन था ।  तुम न पढ़ा करते थे और खूब पिटाई खाते थे।  बहाने मार कर हमें भी पिटवाया करते थे । क्लास में जल्दी आया करते थे,खाली पड़े बेंच को देर तक निहारा करते थे । मुझे देख क...

नकुल कुमार के प्यार की अधूरी कहानी... भाग-2

कि मेरे मन के भाव, मन में ही रह जाते हैं प्रिय।। पता नहीं क्या होगा..? संदेह नहीं है खुद पर, किन्तु तुम्हारी कसौटी पर, खरा उतर पाउँगा या नहीं, ये बात परेशान करती हैं मुझे। सोचता हूँ , क्यों न कह दूं तुमसे। सारी बातें ,जो मेरे मन में हैं। किन्तु डरता हूँ, पता नहीं, तुम्हें अच्छा लगे,नहीं भी।। मन में एक डर , सदैव उमड़ा करता है। 2020 का समय भी निकट हैं, और तुम्हें खोने का एहसास भी।। ... ... ...

नकुल कुमार के प्यार की अधूरी कहानी भाग-01

मुझसे कुछ नहीं कहते हो, इतना चुप क्यों रहते हो। बेजान पड़ा ये माली हैं, सूखी जबसे ड़ाली हैं । इंस्टाग्राम छोड़ा तुमने, अब मैसेंजर भी खाली खाली हैं। इतनी तड़प तुम सहते हो, फिर भी कुछ नहीं कहते हो। ... ...

...... मज़हबीकरण

घंटो बैठे , निहारते रहता हूँ। समाज से समाज को,  पुकारते रहता  हूँ।  अपने संसार का , वह सामाजिक ताना-बाना।  सभी क्यों गाने लगे है , क्रूर  कट्टरता का गाना।  कहाँ गई ईद की , वह सेवई की मिठास।  अब होली के पुए में भी , आने लगी है खटास।  अब कहाँ  कोई हिन्दू , मस्जिद के बहार नजर आता हैं।  इस कदर उसे , संदेह से देखा जाता हैं।  घर वापसी की ख़बर सुनकर , कमला बेगम सिहर सी जाती है।  जबरन मजहबीकरण की , उसकी अतीत ताजी हो जाती है।  अब बंटवारा होगा लहू का , भाईचारे का भी हरण होगा।  मिटटी, पानी और हवा का , मज़हबीकरण होगा।  धन्यवाद  कवि:-नकुल कुमार मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण बिहार  Mb. 08083686563

Happy Birthday to you Dear Papa G

चरण आपकी छूलूं, करूं मैं वंदन बारंबार। सुख-दुख के दोनों तीरों पर, दिया है मुझको प्यार।। ऐसे मेरे मात पिता , अपना छोटा सा संसार।। चरण आपके छूलूं, करू मैं वंदन बारंबार ।। पढ़ा लिखा आपने हमको, दिया खुशी अपार।। आगे बढ़ रहे हैं हम, सब करलो थोड़ा और इंतजार।। चरण आपके छूलूं, करू मैं वंदन बारंबार ।। मेहनत लगन से लगे हम सब, ताकि खुशियों से पूर्ण हो संसार।। खूब कमाए खुश रखे आपको, बढ़ता रहे सबमें प्यार।। चरण आपके छूलूं, करू मैं वंदन बारंबार ।। एक दिन आपके लिए बहू लाएंगे, घर द्वार पोते-पोतियों से भर जाएंगे, रात भर जीन्हें लोरी सुनाकर, आप बाहों में उन्हें सुलाएंगे।। क्या खूब प्रेम के रिश्ते होंगे, होगा प्यारा अपना संसार।। चरण आपके छूलूं, करू मैं वंदन बारंबार । लेखक: नकुल कुमार फाउंडर: बचपन पढ़ाओ आन्दोलन N.T.C. CLUB MOTIHARI

..........यादों में 2017...👌...👍...💐

पुराने साल में जो गिले-शिकवे थे, उन्हें भुला देना सनम।। नए साल में, मोहब्बत की नई दास्तान लिखने की, एक आरजू है हमारी।। बहुत लड़ाई झगड़े हम, मोहब्बत भी तो हमने हीं की थी।। कुछ बे...

.........अच्छा है।

बस  तनहाई में कुछ लिख लेता हूं...📝,कुछ गा लेता हूं...🎤 कुछ गुनगुना लेता हूं... जाने क्यों जमाना मुझे आशिक समझता है... प्यास बुझाए जो अधजल गगरी नकुल की, तेरी भरी गगरी से मेरी अधजल गगरी अच्छा है। दिल ये मेरा, गुस्ताखियाँ करता है बार-बार, मिलकर समझाना इसे, अभी यह बच्चा हैं। मुझे दिखाने के लिए तुम जो "फेयर & लवली" लगाते हो, सच कहूं तो तुम्हारा कालापन, फेयर & लवली के गोरेपन से अच्छा है👯 तुम जो बार बार मेसेंजर देखकर ऑफलाइन हो जाते हो , मेरे मैसेज के लिए तुम्हारा यूं बेचैन रहना अच्छा हैं। तुम्हें रूठने और मुझे मनाने🙏 की आदत है, फिर तो तुम्हारा रूठना💔 ही अच्छा है। तुम जो रूठकर दूर-दूर रहते हो मुझसे, ये दूरी नजदिकियों से अच्छा है। कवि: नकुल कुमार

......प्रधान सेवक के आंसू

फफक फफक कर, इतना रोना, जायज नहीं साहब।। कि जी एस टी के जमाने में , गील्सरीन मंहगा न करो।।

............होठों पर तेरी

सुर्ख होठों पर तेरी, जो लाली थी ।  वह लाली,                                                                   चुराई है किसने ।। हमने शामों-पहर, ख्वाबों में पाया हैं तुमको।  घर उसका जले,  जुदाई की साजिश की हैं जिसने ।। इक वफा तुम भी करो, इक वफा हम भी करें। आओ अब संग जीएं, आओ अब संग मरे।।

.....होठों पर तेरी।

सुर्ख होठों पर तेरी, जो लाली थी ।  वह लाली,                                                                               चुराई है किसने ।। हमने शामों-पहर, ख्वाबों में पाया हैं तुमको।  घर उसका जले,  जुदाई की साजिश की हैं जिसने ।। इक वफा तुम भी करो, इक वफा हम भी करें। आओ अब संग जीएं, आओ अब संग मरें।।

....... मोरी देवी मईया

#पत्थरों_में_खो_गईं_मोरी_देवी_मईया । सुना हैँ... पहले बोलती थी, कभी खुद, कभी किसी के शरीर मेँ आकर। पर......पर अब तो जैसे खामोश रहने लगी हैं, मोरी देवी मईया। कई बार गया, कभी पान-बताशा, तो कभ...

स्वच्छ भारत अभियान फेल

हल्का होने के चक्कर में, फंस गए देखो महामना ।। स्वच्छ भारत अभियान में, करने को था किया मना।। नियति यह बिहार की, कमी गठबंधन सरकार की। कागज पर खूब काम हुएं, अख़बारों में नाम हुएं...

इश्क का पत्थर

इश्क का पत्थर, जो फेंकती हों तुम। कसम से बार बार, उठाने को जी चाहता है।। तुम्हारी अदाएं इतनी मदहोश है, कि बार बार तुम्हारी गली में, आने को जी चाहता है।। "नकुल कुमार साह"

मोतिहारी नगरपालिका चुनाव 2017:-

*ध्यान रहें मांस और पैसे से ईमान न बिकने पाए।   *कल नगरपालिका की वोटिंग​ है न...! आप वोट करने जा रहे हैं ना......!!! वोटिंग से पहले ध्यान दीजिएगा कि कौन प्रत्याशी आप के क्षेत्र में काम कर...

प्रेम

प्रेम में वासना का कोई स्थान नहीं है लेकिन यक्ष प्रश्न है कि क्या आज प्रेम है क्या समाज में प्रेम का इस्थान रह गया है और इसका सबसे ज्वलंत उत्तर यही है कि आज शरीर के प्रति परस्...

मैं न आशिक हूं न ही चकोर बस आप हमारे मित्र हो, और इसी मित्र के प्रति मेरे मन में अनन्य प्रेम है। इसके अलावा कुछ भी नहीं। आपको अच्छा लगता है तो स्वीकार कीजिए अन्यथा अस्वीकार करने का आपको पूरा अधिकार है।............इस निश्चिंतता के साथ कि "नकुल कुमार" को बुरा नहीं लगेगा।

कवि:नकुल कुमार 08083686563

आखिर आश्वासन कब तक.......??? और कितने हेमराज, सरहद पर शीश कटाएंगे। गीदड़ कब तक सिंहो की, शहादत पर मौज मनाएंगे । भारत मां की आंचल का, और कितना हरण होगा। कब तक विधवा और बच्चों का, घर-घर में क्रंदन होगा । बिलख रही जनमानस में, विश्वास जगा दो मोदी जी। हत्यारे पाकिस्तानियों का गर्दन, काटकर दिखाओ मोदी जी।। बहुत रहे हम शांत देश, अब और नहीं रह सकते हम। कुत्तों से दामन बचाकर, अब और नहीं चल सकते हम। नक्सलवाद या आतंकवाद, इसे मिटाना होगा अब। 56 इंच का छुपा सीना, दुश्मन को दिखाना होगा अब। वे बंदूक की भाषा समझते हैं, जुमलेबाजी से अब काम नहीं। 125 करोड़ का भरोसा टूटा, तो मोदी तेरा नाम नहीं। And how many Hemraj, Sheesh will cut off on the outskirts. How long till the siren, Will celebrate martyrdom India's mother-in-law, And how much deer would be. How long the widows and children, There will be pain in the house-house. In the belated opinion, Let's believe in the two modi ji The killer is the neck of the Pakistanis, Cut off and show Modi. We are very quiet country, Now we can not live anymore....